कई दिनों से सोच रहा था कि हो आऊं एक दिन अस्सी भी, बनारस में रहो और घाट पर न जाओ तो बेकार है यहाँ रहना । आज घूमते - घुमाते पहुँच ही गया अस्सी घाट, देखने बनारसी ठाट..