मौसम के बेईमान होते ही मेरी भी तबियत नरम हो गई, हमे आज जाना ही पड़ा हेल्थ सेंटर, जाते समय बीएचयू का माहौल देखा तो बड़ा खुशनुमा लगा जिसकी खुशबू आजकल हम दूर से ही ले रहे है क्योंकि हम आर्ट वाले है बैठा दिए गये है अपने बन्द कमरों में और हम इंतज़ार कर रहे कब से फिर रस सोपान होगा हमारा परिसर में., ये छुट्टी कब खत्म होगी पता नही..!

आसाम से उड़ी तितली (तूफान) का असर एक ही दिन में बनारस पहुँच जायेगा इतनी उम्मीद तो नही थी । कल से बादल उमड़ - घुमड़ रहे है..! महामना की बगिया में भी नमी छा गयी है ! माहौल रंगीन तो बन गया है, लेकिन सभी के लिए नही..! इस बेईमान मौसम का आनंद इस समय वही उठा रहा है जिसके पास दुपहिया और पीछे के गद्दी पर *मिज़ाजी सवारी है.., उन्हें तो मौसम का ऐसे ही रोमांटिक होने का इंतजार रहता है..! अब उन्हें मधुबन जाने का मन नही करता, क्योंकि वहाँ प्रेम के लिए सुकून और शांति छीन सी गयी है । हर तरफ प्रेमियों को तीखी नजरें घूरती रहती है । और दो दिन से तो उन्हें खुला आसमां भी अपने बाँहे खोलकर बुला रहा है कि आओ और जी भर के मोहब्बत कर लो..! तितली की तरह उड़ो लेकिन उस आसाम वाली तितली से सावधान रहना कभी भी टपक सकती है । अस्सी घाट के सीढ़ियों पर बैठकर गंगा के बदरंग पानी से ही मोहब्बत को पवित्र करना हो या इस बदरी में लॉन्ग ड्राइव पर सारनाथ के लिए निकलने का मन हो, निकलिए हॉस्टल से और कर लीजिये मोहब्बत..! लेकिन रामनगर जाइएगा तो जेब ढीली होने से बचेगी क्योंकि किलोमीटर में फर्क है, डेढ़ रुपए कम करने के बाद पचास पैसे फिर बढ़ गये है..! वैसे आपको फर्क भी नही पड़ेगा अगर आप भक्त है तो चाहे अपनी नायिका या फिर इस देश के नायक का..! जल्द से जल्द खुले आसमां का आनंद उठा लीजिये यह सीमित है, जल्द ही बनारस में तितली तूफान आसाम से नही, दिल्ली से आने वाला है.., और जब वो आएगा तो रोमियों स्क्वायड की निष्क्रियता को भंग करेगा उसे तो बस इंतजार है 2019 आने का..!

ये क्या, बीमारी भूल कर हम मोहब्बत की तरफ बढ़ने लगे, खैर ये कोरी कल्पना मात्र थी..!  जिसको जैसे भी मोहब्बत, प्यार, इकरार करना है वो कर ही रहा है । सुप्रीम कोर्ट के आदेश और संरक्षण देने के वादे के बाद से मैंने भी अपना एक हमसफ़र, हमराही, रूममेट, पार्टनर खोज लिया, क्योंकि इस माहौल में अकेले रहना मेरे बस की बात नही थी, इंतज़ार था तो बस महामहिम के आदेश का..! अब परिवार वालों को भी आपत्ति नही है।  मेरा पार्टनर ही मेरा सबकुछ है उसी के साथ मेरी सुबह होती है और रात भी, हम दोनों सुख दुःख के साथी है । हम दोनों सोते अलग - अलग पलँग पर है, क्योंकि सोने और चिपकने से प्यार, मोहब्बत का लेना - देना कोशों दूर तक नही है..! हम ये इसलिए बांच रहे है क्योंकि उसके दुपहिया के पीछे वाली गद्दी पर हमी बैठते है..!


हम दोनों साथ में आज हेल्थ सेंटर के लिए भी निकले..!हेल्थ सेंटर पहुँच कर हाल में महामना की मूर्ति को प्रणाम और हृदय से अभिनन्दन किया, क्योंकि आज मेरे पास दवा के पर्याप्त पैसे नही थे, और मेरा इलाज यहाँ मुफ्त होना है वो भी अगले दो साल तक..! हम जैसे कितनें बच्चों का कल्याण इस बगिया में तरह-तरह की सुविधाओं से होता है यह काफी गौरवपूर्ण है । पर्ची काउंटर पर पहुँच कर मैंने पर्ची कटाया और बहिरंग के लगी लाइन में लग गया जिमसें 25 से 30 छात्र थे।  सरकते - सरकते मेरा भी नम्बर आ गया..!  पप्पी लहरी जैसा चेहरा, नवाजुद्दीन जैसा रंग और आयरन मैन ( हॉलीवुड मूवी में ) का एक कलाकार है जिसे शायद टोनी स्टार्क कहते है जैसी बेहतरीन मूछ और दाढ़ी, उमर मेरे दादा जी से 30 से 35 साल कम होगी..!  डॉक्टर साहब ने अपने कलम को घूरते हुए हमसे पूछे क्या हुआ है ? ..."यही वायरल टाइप को जो चल रहा है, सुबह शाम ठंडी लगती है.., खाँसी है और बुखार लग रहा है, खांसी के लिए कन्फर्म हूं लेकिन बुखार ही होता या ऐसे ही गरम - ठंडा चल रहा है ये नही पता", इतना कहकर मैं चुप होगा । घर पर जब कभी मैं बीमार पड़ता था तो मैं घर पर पहले से ही पापा को बता देता कि डॉक्टर पूछेंगे क्या हुआ है तो आपको ही बताना होगा, पापा तो वहाँ बता देते थे लेकिन अब यहाँ सब कुछ हमे ही करना पड़ता है..! धीरे - धीरे बड़ा भी हो रहा हूं ।  बहरहाल अब इमोशनल होने के बजाय डॉक्टर साहब की निद्रा भंग करते है, डॉक्टर साहब कहीं खोये हुए थे,अगले 20 सेकंड तक जब वे कलम को घूर रहे थे, तब तक मैं दो बार आत्ममूल्यांक कर चुका था कि हमको यही हुआ है न कुछ और तो नही है? लेकिन बार बार खांसी आने के कारण इसको तो भूलना मुनासिब नही था..!  डॉक्ट साहब खुद जगे और दुबारा पूछे क्या हुआ है? तो मैंने वही दोहराया लेकिन तबतक मेरे कुछ रोग दूर हो चुके थे, उन्होंने अपने हैण्डराइटिंग में कफ सिरप लिख दिया और एक - दो हाजमोला टाइप की गोली..! दवा काउंटर पर जाकर मैंने पर्ची थमाई दवा ली और अपने कमरे का रुख किया ।

लौटते समय मेरे अंदर सिर्फ एक ही सवाल कौंध रहा था कि डॉक्ट साहब ऐसे ही सब बच्चों का इलाज करते है? आखिर वो कहाँ खोये थे ? कही एकाक बीघा जमीन तो नही देख ली है स्विट्जरलैंड में या चन्द्रमा पर बुक कराने की सोच रहे थे, या फिर पत्नी ने डांटा था ? कुछ ही देर में मैं अपने कमरे पर पहुँच गया, कमरे का बल्ब जलाया लेकिन पंखा नही, और सीधे बिस्तर पर जाकर लेट गया और सोचने लगा कि कितना आसान हो गया है चाँद पर जाना और वहाँ पर जमीन बुक करा लेना.., सोचते - सोचते मैं सो गया और चाँद के सपने देखने लगा..!