अगर आप भी चाहें तो इस जंग में सहभागी बन सकते हैं घर बैठे..

जब कोई भी समस्या आती है तो हमारे सामने यह प्रश्न आता है कि उस समस्या से लड़ने के लिए  हमने क्या किया ....सिर्फ जुबानी जमा खर्च या कुछ रचनात्मक सहयोग भी ....क्योंकि समाज सिर्फ शब्दों से नहीं चला करता है...!

इस महामारी से लड़ने के लिए मैंने व्यक्तिगत तौर पर अपने फेलोशिप का एक हिस्सा प्रधानमंत्री केअर राहत कोष में जमा किया.... और एक सजग नागरिक के तौर पर अपने से जुड़े हुए लोगों को जागरूक करता हूं और स्वयं अपने कर्तव्यों का निर्वहन करता हूँ...!

बहुत पहले हमने अनौपचारिक तौर पर हमने एक संस्था “ नवचेतना फाउंडेशन ” के नाम से स्थापित की थी जो  समाज में विभिन्न प्रकार की जागरूकता  और सहयोग के कार्यक्रम आयोजित करती है ....जिसके माध्यम से यूट्यूब चैनल “ मतवाला ” का संचालन किया जाता है और “ नवचेतना ” पत्रिका का प्रकाशन भी...!

कोरोना महामारी के शुरुआती दिनों में संस्था ने लोगों को जागरूक करने के लिए गांव देहात में पोस्टर चिपकाया गया... लेकिन अब समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं...!

लॉकडाउन की वजह से कुछ भूमिहीन मजदूर अब कोरोना से नहीं बल्कि भूख से लड़ रहे हैं.... इस दिशा में हमारा प्रयास है कि हम खाद्य पदार्थों और स्वच्छता तथा  स्वास्थ्य की रक्षा से  संबंधित आवश्यक वस्तुओं के माध्यम से उनका सहयोग करें....!