भँवर से लड़ो तुम लहरों से उलझो,
कहाँ तक चलोगे किनारे किनारे ।

नवचेतना के ब्लॉग को नई ऊर्जा के साथ शुरू किया जा रहा है टीम को आप सब के सहयोग की आकांक्षा है ।