युवा मन की भटकन


वर्तमान समय में युवा पीढ़ी अत्यन्त पशोपेश में है कि वह करे तो क्या करे, वह अपना भविष्य आज की चकांचौंध भरे समाज में तलाश कर रहा है, वह असमंजस की स्थिति में है कहीं पर भी वह सुरक्षित और प्रकाशपूर्ण जीवन की सम्भावना नही देख पा रहा है, आज की बदलती सामाजिक, राजनैतिक और आर्थिक परिस्थितियों में अपना वजूद तलाश कर रहा है, और जल्दी एश्वर्य जीवन जीने की चाहत में कम उम्र में ही गलत रास्ते का चुनाव कर उस पर चल रहा है ।

वर्तमान समय में शिक्षा का स्तर भी सामान्य से निम्न है, शैक्षिक प्रणाली पूरी तरह नौकर बनाने की मशीनरी है । स्वावलम्बन और आत्मविश्वास से परे शैक्षिक प्रणाली से वह उम्मीद करे भी तो क्या करे क्योकि वर्तमान समय की शिक्षा बडे व्यवसाय का रुप ले चुका है, जहाँ पर व्यवसाय हो वहां किसी की सुरक्षित भविष्य की बात कहाँ से आयेगी, और जो व्यवसायी है उनसे भावनात्मक पहल की क्या उम्मीद की जा सकती है । आज के युवा को चाहिए की वह अपने जीवन को स्वयं प्रकाश की ओर ले जाए, अंधकारपूर्ण जीवन को प्रकाशमय बनाने के लिए स्वयं दीप प्रज्वलित करें ।                  - अवधेश श्रीवास्तव