मैं प्रमोद आप लोगो से बहुत दिन से कुछ बात कहना चाहता था । वह बात जो अंदर ही अंदर इंसान को कमजोर बनाती हैं, सबसे पहले तो मैं कुँवर बेचैन की कुछ पंक्तियों से शुरुआत करना चाहूँगा,

 ''होकर मायूस न यूँ शाम सा ढलते ना रहिये।
जिंदगी भोर हैं सूरज सा निकलते रहिये।। "

आप सोच रहे होंगे कि मैं ये पंक्तियाँ क्यों बोल रहा हूँ। मैंने आज फिर प्रतिदिन कि दिनचर्या की तरह न्यूज़ पेपर उठाया पढ़ने के लिए तो फिर एक प्रतियोगी छात्रा के खुदखुशी की खबर पढ़ी, मेरा मन अंदर से इतना दुःखी और विचलित हो गया ।
क्या यह सरकारी नौकरी आपके जीवन से बढ़ कर होती हैं, क्या आप सरकारी नौकरी नही पाओगे तो आपका जीवन अच्छा नही होगा। किस डर से आप ये फैसला लेते है। क्या समाज के डर से आप ये फैसला लेते हैं कि लोग आपको क्या कहेंगे अरे लोग तो आपको तब भी कहते हैं जब आप अच्छा करते हो और जब बुरा करो तो उसकी तो बात ही मत करो साहब। जिस समाज वालो से डर कर आप ये फैसला लेते हो इनकी क्या हैसियत है जो आपको जज करे। आपकी अपनी लाइफ हैं आप अपने तरीके से जी लीजिए। अलग- अलग सबका टैलेंट होता है सिर्फ उसमें निखार की जरूरत होती हैं। आप दूसरों से ज्यादा खुद को महत्त्व दीजिये। जो आप एक सरकारी नौकर होने के लिए अपनी जान दे रहे हैं स्वयं सरकार बनिये और लोगों को नौकरी दीजिये। आप कही पर भी जाते हैं तैयारी करने के लिए तो आप पढाई के साथ-साथ जीना, रहना, खाना, पीना ,बातें करना इत्यादि सिखते  हैं तो ये असफलता कहा है आप सीख कर तो आ रहे हैं।सरकारी नौकरी इतना जरूरी है तो क्यो लोग सरकारी नौकरी के बाद भी आत्महत्या कर लेते हैं।🙏🙏 तो कृपया अब से ऐसा मत करिये प्लीज. मेरे मित्र द्वारा लिखी गई कुछ पंक्तियाँ,

 तुम सब पाने के काबिल हो
उम्मीद का दिया जलाए रखना ।

तमाम अंधेरों से भी लड़ लोगे
बस यूँ खुद को बचाए रखना..!

प्रमोद कुमार यादव