पिता का न होना, जैसे लगता है ,
मेरे सपनों का न होना !
पिता ही जीवन का ,पहिया होता है,
जिससे जीवन सुन्दर, सभ्य,सफल होता है !

प्रेम भरे सपनों को, मैं न बुन पायी ,
पिता की पुत्री होकर भी, मैं न बन पायी !
मुझे खेद है ,मैं पिता के लिए कुछ न कर पायी,
जीवन के इन संघर्षो से न लड़ पायी !

पर अब मैने ये थाना है, तनुजा 
का ,फर्ज निभाना है !
पंख फैलाकर ,आकाश में उड़ जाना है ,
पिता के सपनों को ,पूरा कर दिखाना है

लेखिका - कु०वर्षा भारतीया, इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रयागराज