जब दो पुराने घनिष्ठ मित्रों की मित्रता के बीच तीसरा व्यक्ति मित्रता की पेशकश करे तो पुराने दो मित्रों की मित्रता में खटास का पड़ना स्वाभाविक है। दरअसल हुआ यूं कि भारत और बांग्लादेश के मध्य प्रगाढ़ संबंधों को भेदने की मंशा से चीन ने बांग्लादेश को आर्थिक सहायता देने की बात कही है।‌ यह सहायता चीन ने ऐसे समय में की है जब भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता नदी जल विवाद को लेकर ठनी हुई है। इस बीच चीन तीस्ता नदी के कुशल प्रबंधन के लिए 1 अरब डॉलर ऋण बांग्लादेश को देगा। इस रकम का उपयोग बांग्लादेश तीस्ता नदी के प्रबंधन में खर्च करेगा।‌ तीस्ता नदी के कुशल‌ प्रबंधन का अभिप्राय इस बात ‌से लगाया जा सकता है कि बांग्लादेश ग्रीष्म ऋतु में होने वाली जल‌ की भारी किल्लत को कम करने और‌ बारिश के दिनों में आने वाली बाढ़ को नियंत्रित करना चाहता है। इसके लिए वह चीन से आर्थिक सहायता लेने जा रहा है।

ऐसे में इस आशंका को बल मिला है कि चीन, भारत को घेरने ‌की मंशा‌ से बांग्लादेश के साथ आ रहा है। बता दें कि पिछले कुछ महीनों से भारत और चीन के संबंध बेहद बुरे दौर से गुजर रहे है। पिछले कुछ महीनों से चीन ने भारत के साथ सीमा रेखा पर संघर्ष की स्थिति पैदा कर रखी है | अक्साई चीन में स्थित गलवान घाटी में दोनों देशों की सेनाओं के आमने-सामने हो जाने से हिंसक झड़प भी हुई, इसके चलते दोनों देशों के कई सैनिक शहीद हो गए थें।

यदि हम तीस्ता नदी जल विवाद की बात करे तो यह विवाद पिछले कुछ वर्षों से सुर्खियों में बना हुआ है। हिमालय की पहाड़ियों से निकलने वाली तीस्ता नदी सिक्किम और पश्चिम बंगाल में बहती हुई यह असम में ब्रह्मपुत्र नदी में मिल जाती है। नदियों को हमेशा देश की समृद्धि का केन्द्र बिन्दु माना जाता रहा है।‌ इसलिए तीस्ता नदी को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच तनाव समय-समय पर सामने आता रहा है।

 


तीस्ता नदी को लेकर जहां सिक्किम और असम के अपने-अपने हित हैं, वहीं पश्चिम बंगाल भी अपना भला देख रहा है। जब सितंबर 2011 में तीस्ता नदी जल विवाद पर भारत और बांग्लादेश के मध्य एक समझौता अपने अंतिम चरण में था, तब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस पर आपत्ति जताई थी। परिणामस्वरूप तीस्ता नदी जल विवाद का निपटारा नहीं हो सका। उसके बाद भी वार्ताओं के कई दौर चले, मगर यह विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक बार फिर जून 2015 में ऐसी उम्मीद की जाने लगी थी कि भारत और बांग्लादेश के मध्य तीस्ता नदी जल विवाद थम जाएगा। जब देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और ममता बनर्जी ने बांग्लादेश का एक साथ में दौरा किया।

लेकिन उसके बावजूद भी समस्या का कोई समाधान नहीं हो सका। साल 2015 से लेकर आज 2020 यानी पिछले 5 वर्षों में इस विवाद का हल नहीं ढूंढ़ा जा सका। ऐसे में चीन ने बांग्लादेश को आर्थिक सहयोग देकर इस विवाद को आगे बढ़ाने का काम किया है। दरअसल, चीन ने पिछले वर्ष बांग्लादेश को विभिन्न परियोजनाओं के लिए 6.4 अरब डॉलर देने की बात कही थी, इस साल चीन ने बांग्लादेश को तीस्ता नदी परियोजना के लिए 1 अरब डॉलर देने की घोषणा की है। 

 

भारत और बांग्लादेश के संबंध हमेशा से मधुर रहे है। यह संबंध भावनात्मक रूप से जुड़े है। बांग्लादेश के अस्तित्व में आने के पीछे की कहानी में भारत के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। बांग्लादेश के 1971 में अस्तित्व में आने से लेकर आज तक भारत के साथ अच्छे संबंध रहे है। यह संबंध न केवल भावनात्मक रूप से बंधे है बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिकता की गहरी छाप दोनों देशों को जोड़े रखती है। यदि हम भारत और बांग्लादेश के मध्य द्विपक्षीय व्यापारिक गतिविधियों की बात करें तो आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2018-19 में भारत ने बांग्लादेश को कुल 9.21 बिलियन डॉलर का निर्यात किया है, जबकि बांग्लादेश ने भारत को 1.04 बिलियन डॉलर का निर्यात किया है। बांग्लादेश, दक्षिण एशिया में भारत का सबसे बड़ा व्यापार भागीदार देश है। भारत और बांग्लादेश के पर्यटन, चिकित्सा, रोजगार और मनोरंजन के क्षेत्र में भी आपसी हित जुड़े हैं। भारत हमेशा से दुनिया के अन्य देशों के साथ-साथ अपने पड़ोसी देशों के साथ शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के सिद्धांत पर काम करता आया है। भारत अपनी 'पूर्व की ओर देखो' और 'पड़ोसी पहले' की नीति में हमेशा बांग्लादेश को तवज्जो देता आया है। मौजूदा कोविद-19 के इस दौर में दोनों देशों ने आपसी सहयोगात्मक रवैये के साथ काम किया है। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि यदि दोनों देशों के मध्य किसी मुद्दे को लेकर विवाद होता है, तो दोनों देशों को आपसी बातचीत द्वारा समस्या का समाधान खोजना चाहिए।

 

~ अली खान

(स्वतंत्र लेखक)

जैसलमेर, राजस्थान

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