देश में पिछले कुछ वर्षों में हार्ट अटैक पीड़ितों की तादाद में भारी बढ़ोतरी हुई हैं। जानकर यह भी बताते हैं कि पूरी दुनिया में भारत में आंकड़े बड़ी तेजी के साथ बढ़ रहे है। लेकिन इसमें सबसे ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि बुजुर्गों से कहीं ज्यादा युवा वर्ग चपेट में आ रहा है। युवा वर्ग का इसके चपेट में आने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। यदि हम मुख्य कारणों की बात करें तो इसमें तनाव और आराम तलब जीवन शैली के साथ-साथ अनियमित नींद हार्ट अटैक के पीछे बड़ी वजह बनकर उभरी हैं। इसके अलावा युवा पीढ़ी में बढ़ता धुम्रपान का जूनून भी जिम्मेवार है। आजकल की युवा पीढ़ी खान-पान के उचित ढंग का ख्याल नहीं करती है, जिससे खाने की गलत आदत का जल्दी शिकार हो जाती है। युवाओं में बढ़ती शराब की लत और वायु प्रदूषण भी जिम्मेवार कारक हैं। 


 

अकसर हार्ट अटैक को बुढ़ापे और बुजुर्गों से जोड़कर देखा जाता था। क्योंकि इसकी चपेट में आने का अनुपात युवा पीढ़ी से कहीं ज्यादा बुजुर्गों का था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों के भीतर आंकड़ों में भारी फेरबदल हुआ है। आंकड़े बताते हैं कि हार्ट अटैक के कुल आंकड़ों में से आधे आंकड़े युवा पीढ़ी के हैं। यदि आने वाले समय में इस कदर हार्ट अटैक का शिकार होती युवा पीढ़ी अपने बढ़ते आंकड़ों में और इजाफा करती है तो यह महामारी का रूप अख्तियार कर सकती है। वहीं हृदय रोग विशेषज्ञ और चिकित्सक डॉ. नित्यानंद त्रिपाठी कहते है कि 'भारत में हृदय रोग की महामारी को रोकने का एकमात्र तरीका लोगों को शिक्षित करना है, अन्यथा देश में आने वाले समय में सबसे अधिक मौतें हृदय रोग के कारण ही होंगी। वे आगे बताते है कि दिल के दौरे का संबंध पहले बुढ़ापे से माना जाता था। लेकिन अब अधिकतर लोग उम्र के दूसरे, तीसरे और चौथे दशक के दौरान ही दिल की बीमारियों से पीड़ित हो रहे हैं। आधुनिक जीवन के बढ़ते तनाव ने युवाओं में दिल की बिमारियों का खतरा पैदा कर दिया है।

 

जैसा कि हृदय में खून की आपूर्ति न होने, हृदय की मांसपेशियों के खराब होने, हृदय की धमनियों में खून का थक्का जमने से हार्ट अटैक आता है। यदि समय रहते पीड़ित व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाया जाए, तो बहुत हद तक संभव है कि उसे मौत से बचाया जा सकता है। ऐसे में यह बहुत जरूरी हो जाता है कि हमें हार्ट अटैक के लक्षणों के बारे में जानकारी हो ताकि हम पीड़ित व्यक्ति को अतिशीघ्रता से अस्पताल पहुंचाए। हम हार्ट अटैक के लक्षणों की बात करें तो इसमें अचानक छाती में बाई तरफ दर्द महसूस होने लगता है, इसके साथ-साथ सांस लेने में तकलीफ़ होने लगती है। घबराहट, चक्कर का आना, कमजोरी, बेचैनी और खांसी के दौरे पड़ने लगते हैं। हार्ट अटैक आने पर पूरा शरीर पसीने से तर-बतर हो जाता है। इससे तनाव, मन अशांत और थकान महसूस होती है। डॉक्टर और विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि दिल का दौरा पड़ने पर अक्सर सीने में तेज दर्द होता है, लेकिन कुछ व्यक्तियों को हल्का दर्द भी होता है। और कई बार ऐसा भी होता है कि महिलाओं, बुजुर्गों और डायबिटीज रोग से पीड़ित व्यक्तियों को इस दर्द का एहसास तक नहीं होता है।

 

वहीं मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के चिकित्सक डॉ. त्रिपाठी बताते है कि सभी हृदय रोगियों में समान लक्षण नहीं होते हैं, छाती का दर्द इसका सबसे आम लक्षण नहीं है। कुछ लोगों को अपच की तरह असहज महसूस हो सकता है और कुछ मामलों में गंभीर दर्द, भारीपन या जकड़न हो सकता है। आमतौर पर दर्द  छाती के बीच में महसूस होता है, जो बाहों, गर्दन, जबड़े और यहां तक कि पेट तक फैलता है। इससे धड़कन का बढ़ना और सांस लेने में तकलीफ होती है। वे कहते हैं कि धमनियां पूरी तरह से बाधित हो जाती है, तो दिल का दौरा पड़ सकता है। जो हृदय की मांसपेशियों को स्थाई नुकसान पहुंचा सकता है। दिल के दौरे में होने वाले दर्द में पसीना आना, चक्कर आना और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं हो सकती हैं। 

 

ऐसे में हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारी से बचने के यथासंभव प्रयास करने चाहिए। इसके लिए हम भरपूर नींद ले सकते हैं, शरीर को अधिक आराम दे सकते हैं, ध्वनि प्रदूषण स्थलों से उचित दूरी बनाए रखें, तनाव लेने से जितना हो सके उतना बचा जाए, घरेलू और शुद्ध खान-पान को बढ़ावा दें, जंक फूड कम से कम उपयोग में लें, संतुलित आहार, धूम्रपान न करने जैसी आदतें विकसित करें। ऐसी अच्छी आदतें हमें स्वस्थ जीवन और सुखद भविष्य दे सकती है। हालांकि कोविद-19 संक्रमण के इस दौर में प्रकृति में बहुत हद तक सुधार हुआ है। इस दौर में लोगों की  दिनचर्या में अच्छा खासा बदलाव आया है। जिससे हार्ट अटैक मामलों कुछ कमी आई हैं।

- अली खान

(स्वतंत्र लेखक)

जैसलमेर, राजस्थान

ई-मेल : Aleekhanbhaiya@gmail.com